मां.... एक हीरा
सोचता था कि अगर मेरी मां मुझे छोड़ कर चली गई तो उसके बाद मेरा क्या होगा,कौन रखेगा मेरा इतना ख्याल,जब में बाहर से घर में दाखिल होता तो बेसाख्ता मुंह से यही आवाज़ निकलती कि मां कहा हो तुम,ओर जब तक आंखे उस हस्ती की दीदार न कर लेती तो दिल को पुरसुकून न मिलता ,अगर मां ही कही बहार चली जाती किसी काम से तो थोड़ी सी देर होते ही कॉल कर कर के जब तक वो घर में नहीं आ जाती थी तब तक राहत की सांस न ले पाता था में ,अगर में फैक्ट्री में अपना काम कर रहा होता तो फोन पर आ रही कॉल से दिल ओर दिमाग खुद ही बोल उठते की देख आ गई तेरी जन्नत (मां)की कॉल ,उठा इसे ओर मुत्मइन कर अपने आप को,फिर जब में कॉल रिसीव करता तो दूसरी साइड से आती हुई आवाज कानों में एक मीठी सी घुटाश घोल देती थी ,वही आवाज़ वही सवाल कि बेटा खाना खाया या नहीं , कैसी लगी मेरी हाथ की सब्ज़ी आज की ,नमक ,मिर्च तो ज्यादा नहीं था न ,वो एक टाइम था ठीक दोपहर के 2:15 का,जब मेरी जन्नत मेरे पास कॉल कर के मेरे हाल पूछ लिया करती थीं,लेकिन कुछ दिनों से देख रहा था कि ये जन्नती चेहरा अब थोड़ा थोड़ा कर के बूढ़ा हुआ जा रहा था ,कुछ टेंशन से तो कुछ बीमारी से,तो कुछ अपनों के आए दिन दिए हुवे तानों से,अब मुझे भी फिक्र सी होने लगी थी कि मेरी मां अब बहुत हद तक झुक के चलने लगी थी,उसमें अब वो ताकत नहीं थी जो पहले थी,में हमेशा इसी बात को सोच कर परेशान रहता था कि ऐसा क्या करूं कि मेरी मां को अब कुछ काम न करना पड़े ,सोच कर ही दिल घबरा उठता था कि इसे कुछ हो न जाए अगर इसे कुछ हुआ तो मेरी तो दुनिया ही लुट जानी है फिर,क्या होगा मेरा, कोन मुझे गले लगाएगा,कौन ध्यान रखेगा मेरा,फिर जैसे ऊपर वाला भी मेरे इन सब सवालों के जवाब देने को तैयार बैठा था,मुझे इन सब सवालों के जवाब जल्दी ही मिलने वाले थे,जो शायद मैने सपनों में भी नहीं सोचा था,अचानक से एक दिन मां की तबियत ज्यादा खराब हुई तो डॉक्टर के पास ले जाया गया,डॉक्टर ने मां को टाइफाइड बुखार होने की वजह बता कर ग्लूकोज चढ़ा दिया जो कि आमतौर पर मेरी मां को हर साल गर्मियों के दिनों में चढ़ता था,तो मुझे लगा कि ये तो हर साल ही मां को ग्लूकोज चढ़ता है ,जल्दी ही मेरी मां सही हो जाएगी,लेकिन नियति को तो कुछ ओर ही मंजूर था,घर लाने के बाद दूसरे दिन मां की तबियत ओर खराब हो गई,जांचे करवाने पर पता चला कि मां की दोनों किडनियां जवाब दे चुकी थी,आंखों के सामने अब अंधेरा छा चुका था,कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करा जाए ,डॉक्टरों के कहने पर हम उन्हें घर ले आए ,ओर ऑक्सीजन पर रखने लगे ,मां को इस हालत में देख कर दिल जोरो कतार रो रहा था, कि ये क्या हाल हो गया मेरी मां का ,मेरी जन्नत इस हाल में आ जाएगी कभी सोचा भी नहीं था,फिर अचानक से एक गिलास में पानी लेकर पीने बैठा ही था, गिलास बस मुंह से लगाया ही था कि बहन की बहुत जोर से चिल्लाने की आवाज़ आई ,में गिलास हाथ से छोड़ कर बाहर भागा तो देखा कि मेरी मां बहन की गोद में फैली हुई थी और बहन उनको सम्भाल नहीं पा रही थी,मैने अपनी मां को गोद में उठा कर चारपाई पर लिटाया तो देखा कि उनकी आंखे एक दम दूध सी सफेद हो गई हैं,में समझ चुका था कि अब मेरी जन्नत मुझे छोड़ कर जाने वाली है,में अपनी भी सुधबुध खो बैठा था,लेकिन अपने को थोड़ा सम्भाल ते हुए में मां को गाड़ी में बिठा कर डॉक्टर के पास लेकर भागा,डॉक्टर ने मां की हालत देखते ही बता दिया कि इनका अब बच पाना मुमकिन नहीं है,लेकिन फिर भी उसने सब को थोड़ी राहत देने के इरादे से मां को एक गोली खिलाते हुए कहा कि अगर इन्होंने इसे झेल ली तो कुछ हद तक चांस है इनके,लेकिन ऊपर वाला तो पहले से ही ठाना बैठा हुआ था कि उसे मेरी जन्नत को अब इस पापी दुनिया में नहीं रहने देना है ,ठीक कुछ घंटे बाद ही मां को बहुत जोरो से घबराहट शुरू हुई और चंद लम्हों बाद ही वो एक मिट्टी के पुतले की तरह शांत हो गई थीं,ओर में बेबस ,लाचार ,निहंग अपनी मां को अपने से दूर हमेशा हमेशा के लिए जाते हुए देखता रह गया ,मेरी दुनिया एक ही झटके में खत्म हो गई थी,अब में बेबस,मजबूर ओर बेचारा बन गया था, अब कोई नहीं था मेरे आगे पीछे न मां और न कोई मां ही जैसा,थी तो बस ,
मेरी मां की दुआ =...=😭😭😪
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